यूपी बीजेपी दफ्तर में दावेदारों का मेला: दिल्ली दरबार में अटकी सूची, कार्यकर्ताओं को मिला 'सब्र रखने' का मंत्र
A throng of aspirants at the UP BJP office
लखनऊ। A throng of aspirants at the UP BJP office, सप्ताहभर बाद लखनऊ लौटे प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह से मिलने के लिए गुरुवार को गौतमपल्ली स्थित आवास एवं प्रदेश कार्यालय पर भारी भीड़ थी।
पदों के लिए भागदौड़ करने वालों की संख्या ज्यादा थी। वो ये जानना चाह रहे थे कि प्रदेश की सूची और क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची कब तक घोषित होगी। उनका भी कहीं नाम है क्या? निगम, आयोग, बोर्ड एवं प्राधिकरण में समायोजन होगा क्या...।
उन्हें अंदर कमरे से निकलने वाले पदाधिकारी बता रहे थे कि ‘सूची दिल्ली में दे दी गई है, अब जो कुछ होगा वहीं से होगा। सब्र रखिए’। कार्यकर्ता आपस में बात करते रहे कि दिग्गजों की खींचतान में सूची फंसी होगी। सप्ताहभर भी लग जाए तो अब आश्चर्य नहीं।
दिल्ली से बुधवार को लौटकर चौधरी एवं धर्मपाल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। माना जा रहा था कि दो दिन में सूची घोषित कर दी जाएगी, लेकिन ऐसी कोई हलचल नहीं दिखी।
वैसे तो अब चर्चा समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की भी हो रही है लेकिन अगर समय से होते हैं तो भी आठ माह से ज्यादा दूर नहीं है, लेेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ दिल्ली में कई बार मैराथन बैठक के बावजूद भाजपा की प्रदेश इकाई नहीं बन सकी।
चर्चा रही कि काशी क्षेत्र से पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की पसंद का ध्यान रखा जाएगा।
सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की जगह नए चेहरों को लेकर पेच फंसा है। हर क्षेत्र के लिए दो-तीन जातियों के दावेदारों की सूची बनाकर दिल्ली में दे दी गई है, जहां से हरी झंडी मिलने पर टीम घोषित होगी। चर्चा है कि संगठन की रचना काशी की धुरी पर घूमेगी।
यानी काशी क्षेत्र के आधार पर अन्य पांच क्षेत्रों के अध्यक्षों का जातीय समीकरण तय होंगे। इस बहाने प्रदेश इकाई विवाद एवं कार्यकर्ताओं की नाराजगी से बचने का प्रयास करेगी। लगभग छह माह पहले केंद्रीय मंत्री चौधरी को कुर्मी चेहरा के रूप में प्रदेश का अध्यक्ष बनाया गया। इसे सपा के पीडीए फैक्टर की काट के रूप में भाजपा का बड़ा दांव कहा गया, लेकिन छह माह बीतने के बावजूद प्रदेश संगठन नहीं बना।
संगठन में नए पदाधिकारियों की संख्या ज्यादा रखने के लिए दो नियम बनाए गए। पहला यह कि संगठन में 10 साल पूरे कर चुके एवं एमएलसी बन चुके पदाधिकारियों को बदला जाएगा। इससे बड़ी संख्या में नए चेहरों को पदाधिकारी बनाने का अवसर बना।
मार्च में नगरीय निकायों में 2805 सभासदों के मनोनयन के बाद से पार्टी ने प्रदेश इकाई बनाने पर विशेष फोकस किया। इस बीच संघ और भाजपा के बीच समन्वय बैठक हुई। कोर कमेटी बैठी। राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने दो दिन लखनऊ में डेरा डाला।
इसके बाद चौधरी और धर्मपाल ने दिल्ली में कई बार राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष एवं तावड़े के साथ मीटिंग की। लेकिन प्रदेश की टीम नहीं बनी। पदाधिकारियों का कहना है कि पूरब, पश्चिम, ब्रज एवं बनारस के कई दिग्गजों ने अपने पसंदीदा नामों की जमकर पैरोकारी की।
इस वजह से भी सूची अटकी। चुनावी साल में क्षेत्रीय अध्यक्षों की बड़ी भूमिका होगी, ऐसे में उनके चयन में सभी पहलुओं का ध्यान दिया जा रहा है।